दुनिया का इकलौता किला जो बिना नींव के पहाड़ पर टिका है"

 🏰 गागरोन किला (झालावाड़): शौर्य और जल-दुर्ग का संगम

गागरोन किला राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित है। यह किला तीन तरफ से आहू और कालीसिंध नदियों के पानी से घिरा हुआ है। 2013 में इसे यूनेस्को (UNESCO) द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।


🏛️ ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और निर्माण

इस किले का इतिहास बहुत प्राचीन है और यह कई राजवंशों के उत्थान और पतन का गवाह रहा है:

  • निर्माण: माना जाता है कि इस किले का निर्माण 7वीं-8वीं शताब्दी में डोड राजा बीजलदेव ने करवाया था। इसी कारण इसे 'डोडगढ़' या 'धूलरगढ़' के नाम से भी जाना जाता है।

  • खींची चौहान शासन: 12वीं शताब्दी के अंत में, देवन सिंह खींची ने डोड राजाओं को हराकर यहाँ 'खींची राजवंश' की स्थापना की। इसके बाद यह क्षेत्र 'खींचीवाड़ा' कहलाया।



⚔️ प्रमुख युद्ध और 'जौहर' की गाथा

गागरोन के किले ने कुल दो प्रसिद्ध शाके (जब वीरों ने केसरिया किया और वीरांगनाओं ने जौहर) देखे हैं:

  1. पहला साका (1423 ईस्वी): मांडू के सुल्तान होशंगशाह ने किले पर आक्रमण किया। उस समय यहाँ के शासक अचलदास खींची थे। अचलदास ने वीरता से युद्ध लड़ा और वीरगति को प्राप्त हुए, जिसके बाद यहाँ की महिलाओं ने जौहर किया।

  2. दूसरा साका (1444 ईस्वी): मांडू के सुल्तान महमूद खिलजी ने आक्रमण किया। इस युद्ध के बाद सुल्तान ने किले का नाम बदलकर 'मुस्तफाबाद' रख दिया था।


🌟 किले की मुख्य विशेषताएं (Architecture)

  • बिना नींव का किला: गागरोन किला दुनिया के उन चुनिंदा किलों में से एक है जिसकी कोई नींव नहीं है। यह सीधे एक विशाल चट्टान पर खड़ा है।

  • तीन परकोटे: सुरक्षा के लिहाज से इस किले के तीन सुरक्षा घेरे (परकोटे) बने हुए हैं।

  • मीठे शाह की दरगाह: किले के अंदर प्रसिद्ध सूफी संत हमीरउद्दीन चिश्ती (जिन्हें मीठे शाह कहा जाता है) की दरगाह है। यहाँ हर साल उर्स का मेला लगता है।

  • संत पीपा जी: भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत पीपा जी का जन्म भी इसी किले में हुआ था। वे राजा से संत बने थे।

  • गिद्ध करई: किले के पीछे एक ऊँची पहाड़ी चोटी है जिसे 'गिद्ध करई' कहा जाता है। प्राचीन काल में यहाँ से राजनीतिक कैदियों को नीचे गिराकर मृत्युदंड दिया जाता था।

📍 पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

  • स्थान: झालावाड़ से लगभग 12 किमी दूर।

  • प्रवेश द्वार: किले के दो मुख्य प्रवेश द्वार हैं - सूरज पोल और गणेश पोल।

  • अंधेरी बावड़ी: किले के अंदर जल संचयन के लिए एक गहरी बावड़ी बनी हुई है।


📝 निष्कर्ष

गागरोन का किला न केवल अपनी वास्तुकला बल्कि अपनी वीरता और आध्यात्मिक महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है। यह प्रकृति और इतिहास का एक अद्भुत मेल है, जहाँ नदियाँ इसकी रक्षा करती हैं और पहाड़ियाँ इसकी गवाह हैं।


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